एकटक उनको ना देखो गौर से,
आज उनके पास भी कुछ काम है .
मस्त चंदा, खुशी रैना ,
खिलखिलाती शाम है .
सुबह का आनंद यूँ,
लेते रहो
कोयलों की चहक में ,
खोते रहो
और किरणे गुदगुदा दें आपको
सुबह की, ये सोच खुश होते रहो .
शाम के बारे में सोचो मत सखे ,
शाम तो आगे बहुत ही दूर है
नींद आ जाएगी तुझको शाम तक,
क्यूँ कि तू तो आदतन मजबूर है .
दोपहर तक का सफ़र तो नाप ले..
शाम होगा क्या? अभी से भांप ले
फायदा क्या व्यर्थ मैं जगता रहे
सुबह की कोयल सुबह फिर ना मिले ?
सोच अब मुझको जकड़ना छोड़ दो
रुख स्वयं का अंत ही अब मोड़ लो
क्यूँ कि
ये सिलसिला है कि टूटने का नाम नहीं लेता,
मैं तब भी नहीं सोता था, और मैं अब भी नहीं सोता ..
मैं आज कल इतना हूँ सोता..
सपने मैं ही हँसता हूँ और सपने मैं ही रोता..
आज कल तो सपने में समुद्र तट जाने लगा हूँ..
सपने में ही सोता और सपने में ही खाने लगा हूँ..
और तो और सपने में ही एक नयी,
दुनिया बनाने लगा हूँ ..
पर वहां रहता कौन है..
नित्च्ज़े या अरविन्द ?
बांसुरी या गिटार ?
अंकल सैम या केसरिया मैम?
स्ट्रॉबेरी या टमाटर ?
स्पीडमैन या G5 ?
क्या फर्क पड़ता है
सपना ही तो है ..
ऐसे मत नकारो उसको
आखिर वो भी अपना ही तो है ..
वाह वाह .. क्या खूब फरमाया है ..
हमको बुद्धू बनाने आया है ..
हाथी खम्बे जैसा नही होता है ..
हमको बताने आया है...
भाई आज शाम को मुझे बहुत काम है..
वैसे मैं भूल गया..तेरा क्या नाम है?
खैर छोड़ ...
अगली बार लिखवा लूँगा ...
और हाँ तेरी जरूरत पडी तो बता दूंगा ...
ठक ठक ..ठक ठक ..
अबे ..ग्यारह बज गए ..मुझे स्कूल जाना है ...
हाँ हाँ कोई बात नहीं ..इस सैटरडे को दोनों साथ चलेंगे !