ये राहें कहीं भ्रम तो नहीं ,
ये आहें कहीं भ्रम तो नहीं ,
ये बाहें भी कहीं भ्रम तो नहीं ?
या फिर सच यही हैं ,
भ्रम लगता है क्यूँ कि मैं भ्रम में हूँ /
पर ये भ्रम क्या चीज है जी ?
जला दूँ सबको तो जलेगा क्या,
भ्रम या वास्तविकता?
पर यह तो...
वास्तविकता के जलने के बाद भी,
नहीं पता चलेगा ...
क्यूँ कि भ्रम तब भी बचा रहेगा...
तो अब क्या ?
क्या सत्ता सापेक्षता की है..
यदि हाँ तो भ्रम और वास्तविकता हैं कहाँ ?
दूर ..दूर ...दूर .... सापेक्ष हि सापेक्ष है....
न भ्रम , न वास्तविकता ....
mst hai bhai......:)
ReplyDeletethank u ankit..
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