Friday, March 11, 2011

कॉफ़ी पीते हुए

क्रांति चौक?,
विश्वविद्यालय का वह केंद्र 
जिसे पैर एवं पहिये ही जानते हैं..

और उस दिन 
आँखों और कानों की सहमति से 
स्थापित हो रहा था 
केंद्र के रूप में 
जिस दिन 
स्टीफेंस 
करोड़ीमल 
रामजस 
सी एल सी से 
आ रहीं 
मिश्रित
आकर्षक  
किंतु चिरपरिचित 
आवाजों ने,
.......गाडी 
रिक्शा 
और कुछ 
परिचित सायों ने, 
पाया उसको  
मित्रों के साथ 
बात करते हुए,
जिसने 
पकड़ लिया 
एक 
हष्ट-पुष्ट दिखता 
विचार / 

अब उसे
कॉफ़ी पीते हुए 
बात करना
अच्छा लगता है 
उस विचार से 
जो पकड़ा था उसने 
क्रांति चौक पर / 

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