अक्षरों को
सहम सहम कर आते देख,
सोचा कि रात को
बुला लूँगा इन्हें ...
अभी
सुन्दर दिखने को व्याकुल है
इस चट्टान से टकरा रहा पानी ..
सामने का नज़ारा ...वाह
मधुर संगीत ..वाह
ठंडी हवाएं ...वाह
होठों के बीच
लगी आग ...वाह
...आह..वो बीच में उठी सफ़ेद लहर ...
..आह ..एक बार फिर से उठी ...
कितनी सुन्दर थी वह लहर ..
...ऐसा कह रहे हैं
खुशी खुशी आते
अक्षर भी .../
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