तुमको देख रहा था तो ख्याल से बात नहीं की..
ख्याल का क्या है ..
अपनी मर्ज़ी से आता है अपनी मर्ज़ी से जाता है ..
ख्यालों के लिए कोई सरहद नहीं होती ..
उनके लिए ना कुछ इस पार ना कुछ उस पार .
ठीक है ...सरहद तो ख्यालों के लिए नहीं होती..
पर सियासत उनके साथ जरूर खेलती है ..
..
सियासत तो अपने आप में एक खेल है ..
आज दुश्मनी तो कल मेल है ..
मेल कि बात कर के जन्म ना दो एक नए ख्याल को ..
क्यूँ कि ये तो कभी ना रुकने वाली रेल है
रेल गाडी मेल हो या पैसेंगेर
जाना तो हम दोनों को दिल्ली है ..
स्टेशन वही रहेगा ...कुली शायद उतना ही लेगा
राही तुम पारस नहीं हो ..
तो ये लोहे की रेल सोना नहीं बनेगी ..
सोना बनाने कि गलती भी मत करना ...
क्यूँ कि तुमको अगले स्टेशन पर उतर जाना है
राही तुम्हारा सफ़र रुक जाएगा ....
गाडी भी सोने की हो गयी तो रस्ते मैं हि लुट जायेगी
और वैसे भी सोने कि पटरी पर गाडी नहीं दौड़ पाएगी...
व्यर्थ ही तेरी लंका लुट जायेगी !
(eddy n sukhi)
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