तो तुम ये कहना चाहते हो ..
रास्ता वही है जो तुम्हारे लिए रास्ता है ..
और वही रास्ता इस दुनिया के लिए है..
यहाँ लोग सत्ता के लिए
कर रहे हैं
खून पे खून ,
किसी को है अहिंसावादी
बनने का जुनून,
कोई रोटी बना रहा है ,
कोई खा रहा है ,
कोई खिला रहा है ,
और कोई ,जिनके पास रोटी नहीं है ..
उनको रोटी दिखा रहा है ,
कोई अपनी फटी पतलून को देख के शरमा रहा है.
और हाँ ..
हाँ ..
वो देखो कोई
मजदूरों पर गाडी चढ़ा रहा है ..
कोई उनको बचा रहा है
किसको ?..
अरे भाई कोई मजदूर को ,
तो कोई गाडी वाले को..
क्या ?..
क्या..
तेरी समझ मैं कुछ भी नहीं आ रहा है ...
:हाँ भाई मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है .....
तो खुद देख,
बाहर निकल कर,
अपने अंधकारमय ,
राजमहल से ..
मेरा दिमाग क्यूँ खा रहा है...