माना कि एक राह पकड वो पा जाएगा मधुशाला ,
पर कैसे वो सह पायेगा खाली प्याला , बिन हाला,
जिसे नशा है साकी का ,और मिल जाए उसको साकी ,
तो फिर फर्क नहीं पड़ता ,हो मधुशाला या गौशाला.
उसे न भाये सुरा न भाए उसको तेरी मधुशाला।
कहना है आसान कहे देता हूँ मैं भी अँधा हूँ,
शायद कोई देख सके मेरे अंतर्मन की ज्वाला।
समझ गया पैमाना जो उस से तुम कहना चाह रहे,
समझा क्या है नशा और क्या है तेरी साकी बाला।
मत कहना मैं नया नया इस मयखाने में आया हूँ,
फिर भी वैसी नहीं मेरी जैसी बच्चन की मधुशाला।
awesome dude! keep it up... your disgustingly good
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