मुझे आज़ाद करने में तू खुद को तोड़ता क्यूँ है;
मेरी तासीर तो तेरे लहू में रच बसी है।
यूँ कर के क़ैद, मेलों में मुझे फिर ढूंढ़ता है;
बता ऐ पीर कैसी ये तेरी चारागरी है।
मेरे होने से मालिक तू अगर होता कज़ा का;
तू ज़िंदा रह मेरे मुंसिफ़, कज़ा तो चल बसी है।
हमारे हाल पर ये पिघलना है कहक़शाँ का;
न छू शबनम को उसमें, यूँ कि, गरमाहट बची है।
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तासीर-Effect/impression
क़ज़ा-Death
चारागर -Doctor
मुंसिफ़ - Judge
कहक़शाँ -Galaxy
शबनम - Dew
मेरी तासीर तो तेरे लहू में रच बसी है।
यूँ कर के क़ैद, मेलों में मुझे फिर ढूंढ़ता है;
बता ऐ पीर कैसी ये तेरी चारागरी है।
मेरे होने से मालिक तू अगर होता कज़ा का;
तू ज़िंदा रह मेरे मुंसिफ़, कज़ा तो चल बसी है।
हमारे हाल पर ये पिघलना है कहक़शाँ का;
न छू शबनम को उसमें, यूँ कि, गरमाहट बची है।
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क़ज़ा-Death
चारागर -Doctor
मुंसिफ़ - Judge
कहक़शाँ -Galaxy
शबनम - Dew