यूँ बहते-बहते ही
आती है, गले लग जाती है
संवेदना वह प्रेयसी है
जो इक नयी कहानी
हर बार सुनाती है।
इसकी कहानियाँ
इक तिलिस्मी व्यापार,
ले जाती हैं उस पार,
टीवी पर बता रहे थे एक ज्ञानी
"मत जाना उधर,
जंगली जानवर और भूत ही
कर सकते हैं राज वहां,
वहां से पिटकर आओगे
यहाँ फालतू में ही अपनी
किरकिरी करवाओगे।
मत पड़ो इस चक्कर में भईया,
फादर श्री भविष्य सिंह
मार देंगे गोली आप को
रोज़ तेल पिलाते हैं
अपनी दुनाली को।
बच गए उनसे तो
बन जाओगे धोबी के कुत्ते।
!! वैसे जितनी आप की उम्र है
उतना तो हमारा अनुभव ही है..
बचाने और इलाज करने का
आप जैसे बेसहारा नवयुवकों का।
आप की स्क्रीन पर हमारे फ़ोन नम्बर्स मौजूद हैं। "
आती है, गले लग जाती है
संवेदना वह प्रेयसी है
जो इक नयी कहानी
हर बार सुनाती है।
इसकी कहानियाँ
इक तिलिस्मी व्यापार,
ले जाती हैं उस पार,
टीवी पर बता रहे थे एक ज्ञानी
"मत जाना उधर,
जंगली जानवर और भूत ही
कर सकते हैं राज वहां,
वहां से पिटकर आओगे
यहाँ फालतू में ही अपनी
किरकिरी करवाओगे।
मत पड़ो इस चक्कर में भईया,
फादर श्री भविष्य सिंह
मार देंगे गोली आप को
रोज़ तेल पिलाते हैं
अपनी दुनाली को।
बच गए उनसे तो
बन जाओगे धोबी के कुत्ते।
!! वैसे जितनी आप की उम्र है
उतना तो हमारा अनुभव ही है..
बचाने और इलाज करने का
आप जैसे बेसहारा नवयुवकों का।
आप की स्क्रीन पर हमारे फ़ोन नम्बर्स मौजूद हैं। "