चलते हुए भी खड़े रहना,
खड़े-खड़े चलना बहुत तेज,
है प्रक्रिया या प्रतिक्रिया..
सतह जवाब दे सकती है.
सच?
तो फिर क्यों बैठे थे तल में,
पालती लगाये,
जहाँ प्रकाश को भी
करना पड़ता है संघर्ष
तुम तक पहुँचने के लिए.
अरे अरे...
बात तो सच है!
जवाब सतहें भी दे सकती हैं..
तो ले लो.
जाना मुझे भी सतह पर है,
पर सवालों से दूर कहीं,
बहना है लहरों के साथ..
जो मिटा देती हैं,
पैरों के निशान भी किनारों पर,
और बना देती हैं अजनबी.
शुक्रिया लहरों का
जो साथ देती हैं
अजनबी बनने की तड़प का.
अजनबी नहीं है
अंजान शहर में
अजनबी होना.