इस कागज़ में दबे हुए
सूखे फूलों की पंखुड़ियां
मुस्कुरा रही हैं
बस यूँ हीं,
उनको जलन नहीं है
उन फूलों से
जिनकी ताजगी और ख्शुबू
हिस्सा है
किसी गुलदस्ते का ,
ये तो पेड़ पर थीं
जब तक सूख नहीं गयीं ,
और सूखने के बाद
मुलाक़ात हो जाती है इनकी
उस कलम से
जो दौड़ रही है
इस कागज़ पर
और खुश हो जाती हैं
उस स्पर्श से /