Sunday, April 3, 2011

मुस्कुराहट

इस कागज़ में दबे हुए 
सूखे फूलों की पंखुड़ियां 
मुस्कुरा रही हैं
बस यूँ हीं,

उनको जलन नहीं है 
उन फूलों से 
जिनकी ताजगी और ख्शुबू 
हिस्सा है 
किसी गुलदस्ते का ,

ये तो पेड़ पर थीं 
जब तक सूख नहीं गयीं ,
और सूखने के बाद 
मुलाक़ात हो जाती है इनकी 
उस कलम से
जो दौड़ रही है 
इस कागज़ पर 
और खुश हो जाती हैं 
उस स्पर्श से /