और उस एक सवाल ने
कर दिया चिंतित मुझे,
क्या दोष दूँ .
उस सवाल करने वाले को ?
या उस माध्यम को
जिसकी वजह से सवाल पैदा हुआ है ..
या फिर स्वयं को,
उस माध्यम से जुड़ा होने के लिए ?
सवाल करने वाले को ,
या फिर उसके उस माध्यम से जुड़े होने को ?
दोष चिंता का भी हो सकता है जो अचानक से टूट पडी /
"उसको हटा दो,
खुद हट जाओ ,
या फिर माध्यम ही नही रहने दो ......"
ऐसे कुछ विकल्प आये तो थे
तो महोदय ये कोई खेल भी नहीं है ..
कौन बनेगा करोडपती का...
कि इनाम एक सही उत्तर पर मिलेगा...
अपना तो बीमा भी नहीं है /
सवाल चारों दिशाओं में
घूम रहे हैं
ग्रहों की तरह ...
जवाबों की रोशनी
उन पर पड़ कर दिन और रात का भेद पैदा कर रही है ...
तो सूर्य पूर्व में निकलता है ....यह एक जवाब है ..?
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